चिंताएं इतनी है कि गिनती अभी जारी है कुछ तो बात है क्योंकि आज दिल कुछ भारी है । अभी दस दिन हुए पुलवामा को ज्ञानी बहुत कुछ कह गए हिम्मतवाले जो भी थे वो भी चुप अब रह गए सभी समझदार नहीं यहां पर गधों से भी लड़ाई जारी है इतना सब कुछ हो गया इसीलिए आज दिल भारी है । जवान ही तो मरा है ऐसी बातें क्यूं करते तुम अगर ना होते वो सीमा पर तो कुत्ते कि मौत मरते तुम उनकी नहीं, ये पता है अपनी जान ही बस प्यारी है सब कुछ लुटा दिया उन्होंने इसीलिए आज दिल भारी है । बड़े सुकून से जो जीते हो महंगी मदिरा भी तुम पीते हो आज भी जो रोटी खाई है उसकी जान की कीमत पर आयी है पर तुमको क्या अड़ी है बस अपनी ही जो पड़ी है क्या सच ही तुझे ये धरती प्यारी है ? यही सोचकर आज दिल भारी है । ये सब देखकर भी शांत है कब तू कुछ बोलेगा कैसे जी रहा इतना होने पर भी कब तेरा खून खौलेगा अब देर ना कर, उठ मेरे यार देश को जरूरत है, कर इसे प्यार कितनी जरूरी तेरी यारी है यही बताने को आज दिल भारी है ।