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Showing posts from February, 2018

डर

किसका है डर, क्या है डर, आज तू बोल चुप मत रह अब, दिल अपना तू खोल । जितना डरेगा उतना ये दुनिया डारायेगी नहीं जो बोला, तो ऐसे ही तुझे खायेगी । जो कहता रहता है तुझे कि है वो तेरा अपना मत देख उसको पाने का तू झूठा सपना । इस उम्र में हर किसी को आकर्षित करता ये मुखौटा जो भी इसकी तरफ जाता, बाद में जरूर है रोता । जिस पर भी करेगा भरोसा, वही तुझे रुलाएगा ज़ख्म दे जाएगा कोई, और तू कह न पाएगा । दुःख तेरे देखकर तब, लोग आएंगे सहलाने नुक्स निकालने आते लोग, और आते बातें बनाने । सबका यही जो काम है, वो उनको करने दे इन छोटी आंधियो से मत डर, तू खुद पर ध्यान दे । तेरा जो बस काम है वो है खुलकर बोलना बस बोलना, न कि अपनी ही बातों को तोलना । कब तक तू यूँ ही हर बात पर सही गलत का सोचेगा रोयेगा बहुत, जब कोई अपनी बातों से तुझे नोचेगा । अब डरना बंद कर तू, आज तो तुझे बोलना पड़ेगा फिक्र मत कर कर मैं हूँ, तेरा दोस्त तेरे लिए लड़ेगा । हिम्मत तो तुझमें भी बहुत है, अकेला भी भारी पड़ेगा शब्दों को भी कम मत आंकना तू, हर शब्द कड़ा तमाचा जड़ेगा । इंतज़ार किस बात का है, उठ अब और बोल जो भी है दिल में,...