किसका है डर, क्या है डर, आज तू बोल
चुप मत रह अब, दिल अपना तू खोल ।
जितना डरेगा उतना ये दुनिया डारायेगी
नहीं जो बोला, तो ऐसे ही तुझे खायेगी ।
जो कहता रहता है तुझे कि है वो तेरा अपना
मत देख उसको पाने का तू झूठा सपना ।
इस उम्र में हर किसी को आकर्षित करता ये मुखौटा
जो भी इसकी तरफ जाता, बाद में जरूर है रोता ।
जिस पर भी करेगा भरोसा, वही तुझे रुलाएगा
ज़ख्म दे जाएगा कोई, और तू कह न पाएगा ।
दुःख तेरे देखकर तब, लोग आएंगे सहलाने
नुक्स निकालने आते लोग, और आते बातें बनाने ।
सबका यही जो काम है, वो उनको करने दे
इन छोटी आंधियो से मत डर, तू खुद पर ध्यान दे ।
तेरा जो बस काम है वो है खुलकर बोलना
बस बोलना, न कि अपनी ही बातों को तोलना ।
कब तक तू यूँ ही हर बात पर सही गलत का सोचेगा
रोयेगा बहुत, जब कोई अपनी बातों से तुझे नोचेगा ।
अब डरना बंद कर तू, आज तो तुझे बोलना पड़ेगा
फिक्र मत कर कर मैं हूँ, तेरा दोस्त तेरे लिए लड़ेगा ।
हिम्मत तो तुझमें भी बहुत है, अकेला भी भारी पड़ेगा
शब्दों को भी कम मत आंकना तू, हर शब्द कड़ा तमाचा जड़ेगा ।
इंतज़ार किस बात का है, उठ अब और बोल
जो भी है दिल में, सारे के सारे राज़ खोल ।
जिनसे तू डरता, हर वो आदमी तुझसे भी है डरता
डर देखकर भी उनकी आंखों में, तू बस खुद में ही है मरता ।
देख, अब देर नहीं करना और जो भी है, अभी सब है कहना
डर को फेंक अब, क्योंकि खुशियों के दरिया में है जो बहना ।
बस शब्द नहीं , तीर होंगे तेरे जो उन्हें इस लड़ाई में हराएंगे
फिर हमारे अपने इतिहास में ही सही, कहीं तो वीर हम भी कहलायेंगे ।
सोचा था कभी ? ये जो चमक तेरे चेहरे पर है, कभी आयेगी
अभी तो सोचा है, बोल अब, ये खुशियां फिर कहीं भी नहीं जाएगी ।
जब तू बोलेगा, तू जीतेगा, और वो हर बार हारते जाएंगे
फ़िक्र मत करना तू , बिल्कुल शाही ज़श्न हम फिर मनाएंगे ।
चल बहुत हुआ हमारा अब सोचना समझना और मेरा समझाना
अब तेरी बारी है मेरे दोस्त, और तुझे खुलकर है बोलना ।
शब्दों को ऐसे चुनना कि शब्द ही गहरे घाव दे जाएं
तू अगर चला भी जाये तो तेरे शब्द भी उनको जला पाएं ।
अभी तो बहुत जीना है हमको, किस किससे डरते जाएंगे
ये तो एक के बाद एक आएंगे, पर हम इनको डरा कर ही भगाएंगे।
मान कर चलिए एक पल की हिम्मत है बस जो तुमको चाहिये
हमारे तो कान तरस गए जनाब, अंत में अब तो कुछ फरमाइये ।
चुप मत रह अब, दिल अपना तू खोल ।
जितना डरेगा उतना ये दुनिया डारायेगी
नहीं जो बोला, तो ऐसे ही तुझे खायेगी ।
जो कहता रहता है तुझे कि है वो तेरा अपना
मत देख उसको पाने का तू झूठा सपना ।
इस उम्र में हर किसी को आकर्षित करता ये मुखौटा
जो भी इसकी तरफ जाता, बाद में जरूर है रोता ।
जिस पर भी करेगा भरोसा, वही तुझे रुलाएगा
ज़ख्म दे जाएगा कोई, और तू कह न पाएगा ।
दुःख तेरे देखकर तब, लोग आएंगे सहलाने
नुक्स निकालने आते लोग, और आते बातें बनाने ।
सबका यही जो काम है, वो उनको करने दे
इन छोटी आंधियो से मत डर, तू खुद पर ध्यान दे ।
तेरा जो बस काम है वो है खुलकर बोलना
बस बोलना, न कि अपनी ही बातों को तोलना ।
कब तक तू यूँ ही हर बात पर सही गलत का सोचेगा
रोयेगा बहुत, जब कोई अपनी बातों से तुझे नोचेगा ।
अब डरना बंद कर तू, आज तो तुझे बोलना पड़ेगा
फिक्र मत कर कर मैं हूँ, तेरा दोस्त तेरे लिए लड़ेगा ।
हिम्मत तो तुझमें भी बहुत है, अकेला भी भारी पड़ेगा
शब्दों को भी कम मत आंकना तू, हर शब्द कड़ा तमाचा जड़ेगा ।
इंतज़ार किस बात का है, उठ अब और बोल
जो भी है दिल में, सारे के सारे राज़ खोल ।
जिनसे तू डरता, हर वो आदमी तुझसे भी है डरता
डर देखकर भी उनकी आंखों में, तू बस खुद में ही है मरता ।
देख, अब देर नहीं करना और जो भी है, अभी सब है कहना
डर को फेंक अब, क्योंकि खुशियों के दरिया में है जो बहना ।
बस शब्द नहीं , तीर होंगे तेरे जो उन्हें इस लड़ाई में हराएंगे
फिर हमारे अपने इतिहास में ही सही, कहीं तो वीर हम भी कहलायेंगे ।
सोचा था कभी ? ये जो चमक तेरे चेहरे पर है, कभी आयेगी
अभी तो सोचा है, बोल अब, ये खुशियां फिर कहीं भी नहीं जाएगी ।
जब तू बोलेगा, तू जीतेगा, और वो हर बार हारते जाएंगे
फ़िक्र मत करना तू , बिल्कुल शाही ज़श्न हम फिर मनाएंगे ।
चल बहुत हुआ हमारा अब सोचना समझना और मेरा समझाना
अब तेरी बारी है मेरे दोस्त, और तुझे खुलकर है बोलना ।
शब्दों को ऐसे चुनना कि शब्द ही गहरे घाव दे जाएं
तू अगर चला भी जाये तो तेरे शब्द भी उनको जला पाएं ।
अभी तो बहुत जीना है हमको, किस किससे डरते जाएंगे
ये तो एक के बाद एक आएंगे, पर हम इनको डरा कर ही भगाएंगे।
मान कर चलिए एक पल की हिम्मत है बस जो तुमको चाहिये
हमारे तो कान तरस गए जनाब, अंत में अब तो कुछ फरमाइये ।
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