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Showing posts from May, 2018

ख़ुशबू

एक हवा का झौंका आया था ख़ुशबू भी संग लाया था तेज़ हवा सब ले गई अपनी ख़ुशबू मुझको दे गई ।   तेवर अपने अब बदल गए ख़ुशबू जो अपने संग थी हम जो राजा थे यहाँ के और बाकी दुनिया नंग थी ।   खुश थे हम और बाकी सब ख़ुशबू पर जो हक़ था अपना डर था दिल के एक कोने में अपने क्या करेंगे अगर हुआ ये एक सपना ।   सपना ही होगा जो जिया था एक कड़वा घूट भी पिया था नींद चैन सब अब छूट गया सपना भी एक दिन टूट गया ।   ख़ुशबू अब ज़ेहन में घुल गयी पुरानी थी जो यादें, सब धुल गयी अब फ़िर से उम्मीद करना भूल थी क्योंकि अब हवा संग ख़ुशबू नहीं धूल थी ।   धूल आंखों में वो दे गई ख़ुशबू मुझसे वो ले गई थोड़ा सा तो मैं भी रोया था अपनी ख़ुशबू को जो खोया था ।