एक हवा का झौंका आया था
ख़ुशबू भी संग लाया था
तेज़ हवा सब ले गई
अपनी ख़ुशबू मुझको दे गई ।
तेवर अपने अब बदल गए
ख़ुशबू जो अपने संग थी
हम जो राजा थे यहाँ के
और बाकी दुनिया नंग थी ।
खुश थे हम और बाकी सब
ख़ुशबू पर जो हक़ था अपना
डर था दिल के एक कोने में अपने
क्या करेंगे अगर हुआ ये एक सपना ।
सपना ही होगा जो जिया था
एक कड़वा घूट भी पिया था
नींद चैन सब अब छूट गया
सपना भी एक दिन टूट गया ।
ख़ुशबू अब ज़ेहन में घुल गयी
पुरानी थी जो यादें, सब धुल गयी
अब फ़िर से उम्मीद करना भूल थी
क्योंकि अब हवा संग ख़ुशबू नहीं धूल थी ।
धूल आंखों में वो दे गई
ख़ुशबू मुझसे वो ले गई
थोड़ा सा तो मैं भी रोया था
अपनी ख़ुशबू को जो खोया था ।
Comments
Post a Comment