समझदार और जिम्मेदार होता जो
वही होता है एक सभ्य समाज
सुना तो बहुत है मैंने इसका
पर देखा नहीं, न कल, न आज ।
नाम तो भारी है इसका काफी
शायद होगा भी कुछ ऐसा ही समाज
पर अक्ल के अंधे ही मिले आज तक
जो करते हैं, हमारा समाज, तुम्हारा समाज ।
वो आकाश की शादी में सुना था
जो लोग थे , वही था समाज
पर ये तो भूखे थे, जो खाने आये थे
और ये भूख तो कल भी थे, और है आज ।
कुलदीप का भाई मरा था,
तब आने वाला था एक समाज
दो लोग दिखे मुझे वहां
जो कल तक न दिखे, न दिखे आज ।
आशु के पिताजी बीमार थे,
तब सुना था आयेगा समाज
पर दो चार लोग ही थे वो तो
कल तक तो थे नहीं, पता नहीं कहाँ से आये आज ।
ललित का ब्याह रचाया था
तब आया था बहुत बड़ा समाज
पर घर में कलह आज तक होती है
पर ब्याह के बाद कभी न दिखा वो समाज ।
कहने को तो लाला मास्टर थे
वो बताते थे, ये समाज वो समाज
अरे लाला जी, क्या फायदा हुआ आपकी पढ़ाई का
जो आप भी करते हो फालतू बात आज ।
कविता की शादी की थी जब
तब भी दिखा था समाज
वो दहेज के चक्कर में मारी गयी
जख्म तो किसको लगा पता नहीं,
पर दो आंसू दिखा गया कोई आज ।
अपने बच्चों का होश नहीं किसी को
दूसरों को देखता है बस समाज
कलह हो जाती है घर में
क्योंकि क्या कहेगा समाज ।
थोड़े दिन पहले कुछ लोग सड़कों पर आए थे
सुना फिर मैंने की ये है समाज
कैसे लोग है ये जो पढ़ लिखकर भी अनपढ़ है
लानत थी इन पर कल तक, और है आज ।
काटोगे तो खून सबका लाल निकलेगा
फिर पता नहीं कहाँ से आया ये समाज
कल तक तो बस हिन्दू मुसलमान था
ब्राह्मण राजपूत और जाट बन गया ये आज ।
पता नहीं किसका डर है
कौन है, कहाँ है ये समाज
बड़ा गंदा है जो भी है, जैसा भी है
मेरा तो नहीं, आपका है तो आप रखो ये समाज ।
वही होता है एक सभ्य समाज
सुना तो बहुत है मैंने इसका
पर देखा नहीं, न कल, न आज ।
नाम तो भारी है इसका काफी
शायद होगा भी कुछ ऐसा ही समाज
पर अक्ल के अंधे ही मिले आज तक
जो करते हैं, हमारा समाज, तुम्हारा समाज ।
वो आकाश की शादी में सुना था
जो लोग थे , वही था समाज
पर ये तो भूखे थे, जो खाने आये थे
और ये भूख तो कल भी थे, और है आज ।
कुलदीप का भाई मरा था,
तब आने वाला था एक समाज
दो लोग दिखे मुझे वहां
जो कल तक न दिखे, न दिखे आज ।
आशु के पिताजी बीमार थे,
तब सुना था आयेगा समाज
पर दो चार लोग ही थे वो तो
कल तक तो थे नहीं, पता नहीं कहाँ से आये आज ।
ललित का ब्याह रचाया था
तब आया था बहुत बड़ा समाज
पर घर में कलह आज तक होती है
पर ब्याह के बाद कभी न दिखा वो समाज ।
कहने को तो लाला मास्टर थे
वो बताते थे, ये समाज वो समाज
अरे लाला जी, क्या फायदा हुआ आपकी पढ़ाई का
जो आप भी करते हो फालतू बात आज ।
कविता की शादी की थी जब
तब भी दिखा था समाज
वो दहेज के चक्कर में मारी गयी
जख्म तो किसको लगा पता नहीं,
पर दो आंसू दिखा गया कोई आज ।
अपने बच्चों का होश नहीं किसी को
दूसरों को देखता है बस समाज
कलह हो जाती है घर में
क्योंकि क्या कहेगा समाज ।
थोड़े दिन पहले कुछ लोग सड़कों पर आए थे
सुना फिर मैंने की ये है समाज
कैसे लोग है ये जो पढ़ लिखकर भी अनपढ़ है
लानत थी इन पर कल तक, और है आज ।
काटोगे तो खून सबका लाल निकलेगा
फिर पता नहीं कहाँ से आया ये समाज
कल तक तो बस हिन्दू मुसलमान था
ब्राह्मण राजपूत और जाट बन गया ये आज ।
पता नहीं किसका डर है
कौन है, कहाँ है ये समाज
बड़ा गंदा है जो भी है, जैसा भी है
मेरा तो नहीं, आपका है तो आप रखो ये समाज ।
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