छोटी सी उम्र से
सपने पाले थे बड़े बड़े
और हार जाता था मैं
यूँ ही कभी कभी खड़े खड़े
बिना सोचे समझे दौड़ रहा था
इसीलिए जल्दी था हांफता
कल क्या होने वाला है
ये मैं तो क्या , कोई और भी नहीं था जानता
सोचा सब छोड़ कर भाग जाऊं
पर क्या करूँ , ये दिल नही मानता ।
संघर्ष सभी को करना है
एक दिन ऐसे ही मरना है
क्यों न ज़िन्दगी ऐसी बनाई जाए
कि जीने में भी मज़ा आए
क्या करना है , कैसे करना है
ये फिलहाल तो मैं नहीं जानता
और कल क्या होने वाला है
ये मैं तो क्या , कोई और भी नहीं था जानता
सोचा सब छोड़ कर भाग जाऊं
पर क्या करूँ , ये दिल नही मानता ।
पिताजी भी तो लड़े थे
कुछ भी नहीं था घर में फिर भी आगे बढ़े थे
उम्र बढ़ रही थी उनकी
पर सपने अभी भी बड़े थे
क्योंकि उन्हें भरोसा था कि
उनके बच्चे उनके लिए खड़े थे
पर कल क्या होने वाला है
ये मैं तो क्या , कोई और भी नहीं था जानता
सोचा सब छोड़ कर भाग जाऊं
पर क्या करूँ , ये दिल नही मानता ।
माँ भी तो लड़ी थी
हर कदम पर पिताजी के साथ खड़ी थी
अपने सपनों को दाँव लगाकर
सब परिवार के लिए लड़ी थी
उम्र में भले ही पिताजी से छोटी थी
पर फिर भी उनके बराबर बढ़ी थी
माँ पिताजी जिंदगी के रथ को आगे बढ़ रहे थे
और कैसे भी करके अपने बच्चों को आगे बढ़ा रहे थे
पर बच्चे भी उनके लिए कुछ कर रहे थे
ये कोई नहीं था मानता
पर कल क्या होने वाला है
ये मैं तो क्या , कोई और भी नहीं था जानता
सोचा सब छोड़ कर भाग जाऊं
पर क्या करूँ , ये दिल नही मानता ।
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PS : first posted on my facebook account.
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