तुझे तो शायद याद नहीं होगा
क्योंकि उन दिनों तू बहुत छोटा हुआ करता था
पर जब तू धीरे धीरे बड़ा हो रहा था
ठीक उसी समय तुझसे अलग हुआ एक टुकड़ा हूँ मैं ।
तेरा खयाल तो मां रख लेती थी
क्योंकि तू उनका हिस्सा था
पर तूने कभी ध्यान ही नहीं दिया मुझ पर
क्योंकि तुझे तो शायद पता भी न होगा
कब तेरे बड़े होते होते मैं टूट गया तुझसे
तू बहुत छोटा हुआ करता था न उन दिनों
तो इसीलिए शायद तू भूल गया होगा
कि तुझसे ही अलग हुआ तेरा ही एक टुकड़ा हूँ मैं ।
हालांकि तूने कभी ध्यान नहीं दिया
न मुझ पर न उन खिलौनों पर
जो पिताजी ने तुझे तोहफ़े में दिए थे
जानते हुए की भूल जाएगा इस टुकड़े को
तुझे भुलाने के यत्न तो मैंने भी बहुत किये थे
मेरा तो जीना तुझसे था सीसीलिये तू मुझे याद था
और मैं तेरा कुछ था नहीं इसीलिए भूल गया तू
की तुझसे ही अलग हुआ तेरा ही एक टुकड़ा हूँ मैं
तेरे पास तो पिताजी भी तो थे
मेरा तो कोई न था तेरे सिवा
पर जैसा तू उनका था
वैसा मैं कभी तेरा न था
तरसा नहीं ना प्यार के लिए तू
शायद इसीलिए भूल गया होगा
कि तुझसे अलग हुए तेरा ही एक टुकड़ा हूँ मैं ।
खिलौने तो बहुत जोड़े थे तूने
उनमें से बहुत से तो खुद तोड़े थे तूने
मरता क्या न करता, बहुत टुकड़े थे
आखिरी सांस तक खुद ही जोड़े थे
कोशिश तो बहुत की थी
पर तूने तो सुना नहीं तुझसे जो कहा गया
और तेरा पागल मन तुझसे ये बेवकूफी करवा गया
साथ ही मेरे जैसे लाखों टुकड़े बहा गया ।
झूठ मत बोलना देखा तो तूने भी था
जब किसी कोने में पड़ा अकेला मैं रोता था
बुरा किसी और बात का न लगा
लगा तो बस इस बात का कि
माना किसी और का तो मैं था ही नहीं
तो उनमें से किसी ने अपनाया ही नहीं
पर सब देखते हुए भी तू क्यों भूल गया
कि तुझसे ही अलग हुए तेरा ही एक टुकड़ा हूँ मैं ।
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